विजय सिंह ने टाटा संस के बोर्ड से दिया इस्तीफा, IPO से पहले कंपनी को झटका; जानें क्यों हुआ हाईप्रोफाइल एग्जिट
टाटा ट्रस्ट के उपाध्यक्ष विजय सिंह ने टाटा संस के बोर्ड से इस्तीफा दे दिया है. टाइम्स ऑफ इंडिया की रिपोर्ट के अनुसार, यह फैसला एक अहम बोर्ड बैठक से पहले आया है जिसमें IPO और अन्य रणनीतिक मामलों पर चर्चा होनी थी. अब टाटा ट्रस्ट्स का बोर्ड प्रतिनिधित्व केवल नोएल टाटा और वेणु श्रीनिवासन के पास रहेगा.
Tata Sons Vijay Singh resignation: टाटा ट्रस्ट के उपाध्यक्ष विजय सिंह ने टाटा संस के बोर्ड से अपना इस्तीफा दे दिया है. टाइम्स ऑफ इंडिया की रिपोर्ट के अनुसार, यह फैसला एक महत्वपूर्ण बोर्ड बैठक से ठीक एक दिन पहले आया है, जिसमें समूह की होल्डिंग कंपनी टाटा संस के IPO और अन्य रणनीतिक मामलों पर चर्चा होनी है. यह कदम कॉर्पोरेट गवर्नेंस और नेतृत्व में बदलाव के दौर से गुजर रहे 165 बिलियन डॉलर के विशाल समूह के लिए एक बड़ा झटका माना जा रहा है.
इनके पास रहेगा प्रतिनिधित्व
विजय सिंह, टाटा ट्रस्ट के एक प्रमुख चेहरे हैं. उनका यह इस्तीफा बेहद अप्रत्याशित माना जा रहा है. टाटा ट्रस्ट, जिनमें सर दोराबजी टाटा ट्रस्ट और सर रतन टाटा ट्रस्ट शामिल हैं, टाटा संस के लगभग 52 फीसदी शेयरों के मालिक हैं. सिंह के जाने के बाद अब बोर्ड में ट्रस्ट्स का प्रतिनिधित्व केवल उसके अध्यक्ष नोएल टाटा और उपाध्यक्ष वेणु श्रीनिवासन के पास रह गया है. कंपनी की तरफ से अभी तक इस इस्तीफे पर कोई आधिकारिक बयान जारी नहीं किया गया है.
दूसरा था कार्यकाल
यह सिंह का टाटा संस बोर्ड में दूसरा कार्यकाल था. उन्हें पहली बार जून 2013 में बोर्ड में शामिल किया गया था, लेकिन जुलाई 2018 में 70 वर्ष की आयु पूरी होने पर तत्कालीन सेवानिवृत्ति नीति के तहत उन्होंने पद छोड़ दिया था. फरवरी 2022 में, समूह के एमेरिटस चेयरमैन रतन टाटा द्वारा सख्त आयु-सीमा मानदंडों में ढील दिए जाने के बाद उन्हें फिर से बोर्ड में शामिल किया गया था.
RBI के दबाव और IPO की राह
सिंह का इस्तीफा ऐसे समय में आया है जब टाटा संस पर भारतीय रिजर्व बैंक (RBI) का दबाव बढ़ रहा है. RBI ने टाटा कैपिटल को बड़े Non-Banking Finance Company (NBFC) के रूप में वर्गीकृत किया है, जिसके कारण उसे स्टॉक एक्सचेंजों में लिस्ट होने की समयसीमा का पालन करना अनिवार्य हो गया है. इसी के मद्देनजर टाटा संस के IPO की तैयारियां तेजी से आगे बढ़ रही थीं. ऐसे में बोर्ड के एक वरिष्ठ और अनुभवी सदस्य का इस्तीफा निश्चित रूप से एक बड़ी घटना है.
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