ग्लोबल मार्केट पर यूपी का फोकस, पेश हुई नई एक्साइज पॉलिसी; विदेशों में पहुंचेगी ‘Made in UP’ शराब
उत्तर प्रदेश की नई एक्सपोर्ट ओरिएंटेड एक्साइज पॉलिसी राज्य को शराब निर्यात का बड़ा हब बनाने की दिशा में कदम है. सरकार एक तरफ ग्लोबल मार्केट पर नजर रख रही है, तो दूसरी तरफ खेती और इंडस्ट्री के बीच मजबूत कड़ी बनाने की कोशिश भी कर रही है.
उत्तर प्रदेश सरकार ने शराब उद्योग को लेकर एक बड़ा और अलग तरह का कदम उठाया है. राज्य ने 2026 से 2029 तक के लिए एक्सपोर्ट ओरिएंटेड एक्साइज पॉलिसी पेश की है. इसका मकसद शराब के निर्यात को बढ़ाना और यूपी ब्रांड को इंटरनेशनल मार्केट में पहचान दिलाना है. सरकार का मानना है कि आने वाले इंडिया-यूरोपियन यूनियन ट्रेड एग्रीमेंट से नए मौके मिल सकते हैं.
Brand UP को ग्लोबल बनाने पर फोकस
मनीकंट्रोल की रिपोर्ट के मुताबिक, यूपी के एक्साइज मंत्री नितिन अग्रवाल ने कहा कि उत्तर प्रदेश अभी भारत के कुल निर्यात में करीब 11 फीसदी का योगदान देता है और राज्य इस हिस्सेदारी को दोगुना करना चाहता है. उनका कहना है कि पहली बार किसी राज्य ने इस तरह की अलग एक्सपोर्ट पॉलिसी लाई है, ताकि यूपी के ब्रांड्स को विदेशों में जगह मिल सके.
सिंगल माल्ट व्हिस्की पर खास जोर
नई पॉलिसी के तहत कंपनियों को एक्सपोर्ट के लिए सिंगल माल्ट व्हिस्की बनाने के लिए प्रोत्साहित किया जा रहा है. फिलहाल राज्य से सिर्फ दो कंपनियां Radico Khaitan और Mohan Meakin सिंगल माल्ट निर्यात करती हैं. रिपोर्ट के अनुसार, Radico अपनी क्षमता बढ़ा रही है और उसके दो ब्रांड्स को विदेशों में अच्छी प्रतिक्रिया मिल रही है. अब तीन और कंपनियों ने इस सेगमेंट में दिलचस्पी दिखाई है. प्रोडक्शन की तैयारी Modi Distillery (Modinagar), Indo Spirits (Muzaffarnagar) और Globus Spirits (Lakhimpur Kheri) में चल रही है.
टेस्टिंग टैवर्न्स और हेरिटेज लिकर की अनुमति
पॉलिसी में विदेशी मेहमानों के लिए टेस्टिंग टैवर्न्स खोलने की अनुमति दी गई है. इसके अलावा, डिस्टिलरीज को एक्सपोर्ट के लिए हेरिटेज लिकर बनाने की छूट भी मिलेगी. सरकार का मानना है कि इससे यूपी के पारंपरिक और प्रीमियम ब्रांड्स को नया बाजार मिल सकता है.
खेती से जुड़ी सप्लाई चेन को मजबूती
पॉलिसी का एक बड़ा पहलू एग्रीकल्चर से जुड़ा है. स्थानीय अनाज और फलों का इस्तेमाल कर एथेनॉल और दूसरे प्रोडक्ट के उत्पादन को बढ़ावा दिया जाएगा. इससे किसानों और फार्म-लिंक्ड इंडस्ट्री को फायदा मिलने की उम्मीद है. इसके अलावा सरकार ने निर्यात को आकर्षक बनाने के लिए कई शुल्कों को न्यूनतम स्तर पर कर दिया है. इसमें बॉटलिंग ड्यूटी, एक्सपोर्ट पास फीस, फ्रेंचाइजी फीस और स्पेशल फीस शामिल हैं. ब्रांड रजिस्ट्रेशन और लेबल अप्रूवल के नियम भी आसान किए गए हैं.
सरकार को उम्मीद है कि इससे निवेश बढ़ेगा, साथ ही पैकेजिंग, लॉजिस्टिक्स और एक्सपोर्ट सर्विसेज जैसे सेक्टर्स में रोजगार के नए अवसर बनेंगे.
इंडस्ट्री ने किया स्वागत
वाइन इंडस्ट्री से जुड़े खिलाड़ियों ने इस पॉलिसी को सकारात्मक कदम बताया है. Mbrosia Nature Living के सीईओ माधवेन्द्र देव सिंह ने कहा कि यह पॉलिसी खेती से जुड़े उद्यमों को ताकत देने वाली है. उनकी कंपनी “Maeve” लेबल के तहत फ्रूट-बेस्ड वाइन बनाती है. उन्होंने कहा कि टेस्टिंग टैवर्न्स खुलने से लोगों में वाइन को लेकर समझ बढ़ेगी और घरेलू बाजार मजबूत होगा.
शराब की कीमतों में बदलाव
2026-27 के लिए एक्साइज विभाग ने 71,278 करोड़ रुपये का रिकॉर्ड रेवेन्यू टारगेट रखा है, जो मौजूदा वित्त वर्ष के लगभग 60,000 करोड़ रुपये के लक्ष्य से करीब 13 प्रतिशत ज्यादा है. नई पॉलिसी के तहत IMFL की कीमतों में 10 से 40 रुपये तक की बढ़ोतरी होगी. बीयर की कीमतें स्थिर रहेंगी वहीं, इंडियन मेड वाइन और लो-इंटेंसिटी अल्कोहलिक बेवरेज सस्ते होंगे.
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