भारतीय सेना के पास अब शक्तिबाण, 500 KM दूर बैठे दुश्मन पर ड्रोन करेंगे हमला, SWARM और UAV बनेंगे ब्रह्मास्त्र
भारतीय सेना ड्रोन युद्ध क्षमता को मजबूत करने के लिए 15 से 20 शक्तिबाण रेजिमेंट तैयार कर रही है. इन रेजिमेंट में स्वार्म ड्रोन लोइटरिंग म्यूनिशन और लंबी दूरी के UAV शामिल होंगे. इनकी मारक क्षमता 5 किमी से 500 किमी तक होगी. यह बदलाव आधुनिक युद्ध की जरूरतों को ध्यान में रखकर किया जा रहा है.
Shaktibaan Regiment: भारतीय सेना आधुनिक युद्ध की चुनौतियों से निपटने के लिए तेजी से खुद को बदल रही है. इसी कड़ी में सेना 15 से 20 शक्तिबाण रेजिमेंट तैयार कर रही है. इन रेजिमेंट में अत्याधुनिक ड्रोन और लोइटरिंग म्यूनिशन शामिल होंगे. इनकी मारक क्षमता 5 किमी से 500 किमी तक होगी. यह बदलाव सेना प्रमुख जनरल उपेंद्र द्विवेदी की विजन का हिस्सा है . इसका मकसद भविष्य के युद्ध में सेना की ताकत को और मजबूत करना है.
शक्तिबाण रेजिमेंट क्या है
शक्तिबाण रेजिमेंट भारतीय सेना की रेजिमेंट ऑफ आर्टिलरी का हिस्सा होंगी. इन रेजिमेंट में स्वार्म ड्रोन और लंबी दूरी के UAV तैनात किए जाएंगे. कुछ शुरुआती यूनिट पहले ही काम करना शुरू कर चुकी हैं. इनका मुख्य काम दुश्मन के ठिकानों पर सटीक हमला करना होगा. यह नई व्यवस्था सेना की फायर पावर को नई दिशा देगी.
500 किमी तक मार करने की क्षमता
शक्तिबाण रेजिमेंट से सेना की क्षमता में बड़ा विस्तार होगा. अभी सेना के पास 50 किमी से 500 किमी के बीच हमला करने में सीमित साधन थे. नई रेजिमेंट इस कमी को पूरा करेंगी. इससे सीमापार और दूर स्थित ठिकानों पर भी प्रभावी कार्रवाई संभव होगी. ड्रोन आधारित हमला कम समय में ज्यादा सटीक साबित होगा.
ब्रहमोस और पिनाका से भी मिलेगी मजबूती
500 किमी से ज्यादा दूरी के लक्ष्यों के लिए सेना के पास पहले से ब्रहमोस मिसाइल है. इसके साथ ही 120 किमी रेंज की पिनाका रॉकेट प्रणाली भी शामिल की जा रही है. शक्तिबाण रेजिमेंट इन हथियारों की क्षमता को और मजबूत करेंगी. इससे आर्टिलरी की मारक शक्ति कई स्तर पर बढ़ेगी. सेना को मल्टी लेयर अटैक क्षमता मिलेगी.
850 लोइटरिंग म्यूनिशन की खरीद की तैयारी
पहली शक्तिबाण रेजिमेंट को तैयार करने के लिए सेना 850 लोइटरिंग म्यूनिशन खरीदेगी. इसके लिए फास्ट ट्रैक प्रोसेस के तहत टेंडर जारी किया जाएगा. इन म्यूनिशन के साथ जरूरी लॉन्चर भी शामिल होंगे. भारतीय कंपनियां यह सप्लाई करेंगी. अगले 2 साल में यह सिस्टम सेना को मिल सकता है.
भारतीय कंपनियों को मिलेगा बड़ा मौका
इस परियोजना की अनुमानित लागत करीब 2000 करोड़ रुपये बताई जा रही है. सोलर डिफेंस एंड एयरोस्पेस एड डिफेंस और राफे एम जैसी कंपनियां दावेदार हो सकती हैं. इससे देश के डिफेंस मैन्युफैक्चरिंग सेक्टर को बढ़ावा मिलेगा. यह आत्मनिर्भर भारत की दिशा में अहम कदम है. सेना को स्वदेशी तकनीक का लाभ मिलेगा.
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ड्रोन ऑपरेटर और नई यूनिट का गठन
भारतीय सेना ने पहले ही 1 लाख से ज्यादा ड्रोन ऑपरेटर तैयार किए हैं. इसके साथ आर्टिलरी में 35 से 40 दिव्यास्त्र बैटरी भी बनाई जाएंगी. हर इन्फैंट्री बटालियन में अश्मी प्लाटून गठित किए जा रहे हैं. स्पेशल ऑपरेशन के लिए भैरव नाम की नई फोर्स भी बनाई गई है. यह सभी बदलाव सेना को भविष्य के युद्ध के लिए तैयार करेंगे.
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