NSE ने RFP किया जारी, IPO पिच के लिए इन्वेस्टमेंट बैंक और लॉ फर्म को भेजा इनवाइट; जानें- बड़े अपडेट्स
आने वाले हफ्तों में डिटेल्ड प्रेजेंटेशन दिए जाएंगे और इन्वेस्टमेंट बैंकों और लीगल काउंसल का फाइनल सिंडिकेट मार्च के बीच तक सुनिश्चित हो जाएगा. NSE 1992 में बना था और 1994 में भारत के पहले इलेक्ट्रॉनिक स्टॉक एक्सचेंज के तौर पर काम करना शुरू किया.
देश के सबसे बड़े स्टॉक एक्सचेंज नेशनल स्टॉक एक्सचेंज (NSE) ने इस सप्ताह की शुरुआत में एक रिक्वेस्ट फॉर प्रपोजल (RFP) जारी किया. साथ ही IPO पिच के लिए कई इन्वेस्टमेंट बैंकों और लॉ फर्म को इनवाइट किया. इंडस्ट्री के सूत्रों के हवाले से मनीकंट्रोल ने अपनी रिपोर्ट में इस बात की जानकारी दी है.
रिपोर्ट के अनुसार, एडवाइजर के लिए सिलेक्शन प्रोसेस शुरू हो गया है और NSE ने करीब 20 इन्वेस्टमेंट बैंकों और करीब 10 लॉ फर्म से संपर्क किया है. सभी एडवाइजरी फर्म से शुक्रवार तक ट्रैक रिकॉर्ड और टीम डिटेल्स जैसी जानकारी मांगी गई है.
कब दिए जाएंगे डिटेल्ड प्रेजेंटेशन?
आने वाले हफ्तों में डिटेल्ड प्रेजेंटेशन दिए जाएंगे और इन्वेस्टमेंट बैंकों और लीगल काउंसल का फाइनल सिंडिकेट मार्च के बीच तक सुनिश्चित हो जाएगा.
OFS के जरिए बेची जाएगी हिस्सेदारी
SEBI से मिले NOC के अनुसार, बोर्ड ने 6 फरवरी, 2026 को ऑफर फॉर सेल के जरिए कंपनी के इनिशियल पब्लिक ऑफरिंग को मंजूरी दे दी है. फर्म की IPO कमेटी ने टेक्निकल और कमर्शियल प्रपोजल के आधार पर अलग-अलग एजेंसियों से मिलने के बाद, IPO प्रोसेस की देखरेख के लिए रॉथ्सचाइल्ड को एक इंडिपेंडेंट एडवाइज़र के तौर पर चुना है.
रॉथ्सचाइल्ड के ऊपर जिम्मेदारी
रॉथ्सचाइल्ड पर NSE के बयान में आगे कहा गया, ‘काम के दायरे की समरी इस तरह है़. सलाहकार NSE के IPO के लिए BRLMs, लीगल काउंसल और दूसरे इंटरमीडियरी को चुनने के लिए एक ट्रांसपेरेंट, गवर्नेंस से चलने वाले प्रोसेस को लीड करेंगे. जिम्मेदारियों में एक ऑब्जेक्टिव इवैल्यूएशन फ्रेमवर्क बनाना, साफ सिलेक्शन क्राइटेरिया तय करना और सिलेक्शन प्रोसेस के सभी स्टेज को मैनेज करना शामिल है.
डॉक्यूमेंटेशन और क्लैरिफिकेशन से लेकर बैक-ऑफ कोऑर्डिनेशन और इंटरनल स्टेकहोल्डर के इवैल्यूएशन फीडबैक को एक साथ लाने तक. यह भूमिका जानकारी में बराबरी, स्टेकहोल्डर के बीच लगातार कम्युनिकेशन और फैसलों का पूरा डॉक्यूमेंटेशन भी सुनिश्चित करती है.
इंस्टीट्यूशनल शेयरहोल्डर्स
6 फरवरी को हुई NSE बोर्ड मीटिंग के बाद, मौजूदा शेयरहोल्डर द्वारा ऑफर फॉर सेल के जरिए IPO को मंजूरी दी गई. LIC, SBI और सिंगापुर की टेमासेक फर्म के कुछ इंस्टीट्यूशनल शेयरहोल्डर में से हैं.
डेडिकेटेड IPO कमेटी
NSE, जिसे MD और CEO आशीष कुमार चौहान लीड करते हैं, ने बोर्ड मीटिंग के बाद एक डेडिकेटेड IPO कमेटी को फिर से बनाकर अपने IPO गवर्नेंस फ्रेमवर्क को भी मजबूत किया. फिर से बनी IPO कमेटी में, टेबलेश पांडे – चेयरपर्सन (नॉन-इंडिपेंडेंट डायरेक्टर), श्रीनिवास इंजेती – मेंबर (पब्लिक इंटरेस्ट डायरेक्टर), प्रो. (डॉ.) ममता बिस्वाल – मेंबर (पब्लिक इंटरेस्ट डायरेक्टर), जस्टिस (रिटायर्ड) अभिलाषा कुमारी – मेंबर (पब्लिक इंटरेस्ट डायरेक्टर), प्रो. जी. शिवकुमार – मेंबर (पब्लिक इंटरेस्ट डायरेक्टर) और आशीषकुमार चौहान – मेंबर (मैनेजिंग डायरेक्टर और CEO) शामिल हैं.
लिस्टेड पीयर BSE, जिसने 2017 में मार्केट में डेब्यू किया था, के शेयर प्राइस में पिछले साल 62 फीसदी से अधिक की बढ़ोतरी हुई है और फर्म का मार्केट कैप लगभग 1.14 लाख करोड़ रुपये है.
NSE 1992 में बना था और 1994 में भारत के पहले इलेक्ट्रॉनिक स्टॉक एक्सचेंज के तौर पर काम करना शुरू किया. यह इक्विटी, डेट, कमोडिटी, करेंसी और उनके डेरिवेटिव, और एक्सचेंज ट्रेडेड फंड (ETF) जैसे एसेट क्लास में हाई-स्पीड, टेक्नोलॉजी वाला प्लेटफॉर्म देता है.
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