2025 में आए 90 IPO, फिर भी टेंशन में क्यों निवेशक, 4 साल का ट्रेंड बता रहा असलियत, जानें कहां हो रही चूक
अप्रैल 2021 से दिसम्बर 2023 तक निवेशकों ने IPO में अलॉट हुए शेयरों का औसतन 42.7 प्रतिशत हिस्सा एक सप्ताह के भीतर बेच दिया. निवेशकों में यह ट्रेंड इसलिए दिखता है क्योंकि वे कंपनी की लंबी अवधि की संभावनाओं से ज्यादा लिस्टिंग गेन पर फोकस करते हैं.
इंडियन इक्विटी मार्केट में इस साल IPO की जोरदार रफ्तार देखने को मिल रही है. 13 नवंबर 2025 तक, अब तक 90 IPO लॉन्च हो चुके हैं. इनकी मदद से कंपनियों ने 1.51 लाख करोड़ रुपये जुटाए हैं. यह आंकड़ा लगभग उन 1.59 लाख करोड़ रुपये के बराबर है जो पूरे 2024 में कंपनियों ने जुटाए थे. कई बार इश्यू का वैल्यूएशन और लिस्टिंग के बाद की मार्केट प्राइस में भारी अंतर देखने को मिलता है. आंकड़े बताते हैं कि 2021 से 2025 के बीच आए करीब 40 फीसदी IPO आज अपने इश्यू प्राइस से नीचे ट्रेड कर रहे हैं. यानी हर IPO लिस्टिंग गेन नहीं दे रहा. यह जानकारी मिंट के अनुसार है.
लेंसकार्ट का हाई-वैल्यूएशन IPO बना चर्चा का केंद्र
हाल ही में Lenskart अपने हाई-वैल्यूएशन IPO को लेकर चर्चा में रहा. कंपनी ने 70,000 करोड़ रुपये के वैल्यूएशन पर बाजार में एंट्री की. यह इसकी सालाना बिक्री का 10 गुना और FY25 की कमाई का 230 गुना है. इतनी ऊंची कीमत के बावजूद रिटेल निवेशकों ने जमकर बोली लगाई, और रिटेल बुक 7.56 गुना सब्सक्राइब हुई.
हर IPO नहीं दे रहा रिटर्न
IPO मार्केट के इस जबरदस्त उत्साह के बावजूद निवेश जोखिम से खाली नहीं है. कई बार इश्यू का वैल्यूएशन और लिस्टिंग के बाद की मार्केट प्राइस में भारी अंतर देखने को मिलता है. आंकड़े बताते हैं कि 2021 से 2025 के बीच आए करीब 40 फीसदी IPO आज अपने इश्यू प्राइस से नीचे ट्रेड कर रहे हैं. यानी हर IPO लिस्टिंग गेन नहीं दे रहा.
2021 से 2025 तक कितने IPO इश्यू प्राइस से ऊपर हैं?
पिछले चार वर्षों का डेटा यह बताता है कि जितने भी IPO आए, उनमें से करीब 60.4 प्रतिशत स्टॉक्स अभी भी Issue Price से ऊपर ट्रेड कर रहे हैं, जबकि 39.6 प्रतिशत स्टॉक्स नीचे आ चुके हैं. यानी लगभग 40 प्रतिशत IPO मे निवेशकों को नुकसान भी हुआ है. यह बात खुद साबित करती है कि हर IPO पैसा नहीं बनाता और सेलेक्शन सोंच-समझ कर करना चाहिए.
| मापदंड | प्रतिशत (%) | विवरण |
|---|---|---|
| इश्यू प्राइस से ऊपर ट्रेड करने वाले IPO | 60.4% | इन IPO में लिस्टिंग के बाद अभी भी निवेशकों को फायदा है |
| इश्यू प्राइस से नीचे ट्रेड करने वाले IPO | 39.6% | इन IPO में निवेशकों को नुकसान हुआ है |
लिस्टिंग गेन के लिए शेयर पलटने का ट्रेंड
अप्रैल 2021 से दिसम्बर 2023 तक निवेशकों ने IPO में अलॉट हुए शेयरों का औसतन 42.7 प्रतिशत हिस्सा एक हफ्ते के भीतर बेच दिया. निवेशकों में यह ट्रेंड इसलिए दिखता है क्योंकि वे कंपनी की लांग टर्म की संभावनाओं से ज्यादा लिस्टिंग गेन पर फोकस करते हैं. SEBI के एक स्टडी में यह भी पाया गया कि 54 प्रतिशत IPO में रिटेल निवेशकों द्वारा बेचे गए शेयरों ने जल्दी ही अपनी चमक खो दी, जिससे यह साफ होता है कि जल्दी मुनाफा बुक करने की आदत कई बार नुकसान भी करा सकती है.
रिटेल निवेशक IPO में भारी बोली लगा रहे
रिटेल निवेशकों की IPO मे दिलचस्पी लगातार बनी हुई है. 2021 में औसत सब्सक्रिप्शन 19.27 गुना था, जबकि 2022 में यह घटकर 7.47 गुना रह गया. 2023 में एक बार फिर तेजी आई और यह 23.59 गुना तक पहुंचा. 2024 में यह 34.15 गुना हो गया और 2025 में अब तक रिटेल सब्सक्रिप्शन का औसत 24.28 गुना है.
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बिना रिस्क मैनेजमेंट के IPO मुश्किल सौदा
IPO काफी अट्रैक्टिव लगते हैं, लेकिन हर बार इश्यू निवेशकों को फायदा दे, इसकी कोई गारंटी नहीं होती. तेज लिस्टिंग गेन कई बार कंपनी की असली स्थिति को छिपा देता है. इसलिए रिटेल निवेशक को सिर्फ भीड़ देखकर IPO में कूदना नहीं चाहिए. RHP को पढ़कर रिस्क, कैश फ्लो और वैल्यूएशन की पूरी जांच करना जरूरी है.
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डिस्क्लेमर: Money9live किसी स्टॉक, म्यूचुअल फंड, आईपीओ में निवेश की सलाह नहीं देता है. यहां पर केवल स्टॉक्स की जानकारी दी गई है. निवेश से पहले अपने वित्तीय सलाहकार की राय जरूर लें.
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