वंदे भारत ट्रेन के मेगा प्लान से इन रेलवे स्टॉक्स को मिल सकता है बूस्ट, 2047 तक 4500 ट्रेनसेट का लक्ष्य; निवेश का है मौका?

भारतीय रेलवे वंदे भारत ट्रेनों के बड़े विस्तार की तैयारी में है. फिलहाल 164 ट्रेन सेवाएं चल रही हैं, लेकिन सरकार का लक्ष्य 2030 तक 800 और 2047 तक 4,500 वंदे भारत ट्रेनसेट चलाने का है. इस मेगा प्लान से न सिर्फ कनेक्टिविटी बेहतर होगी, बल्कि BEML, BHEL, Titagarh Rail Systems, Ramkrishna Forgings और RVNL जैसे रेलवे शेयरों को भी बड़ा फायदा मिलने की उम्मीद है.

वंदे भारत एक्सपैंशन प्लान और स्टॉक्स Image Credit: @Money9live

Vande Bharat Expansion and Related Stocks: भारतीय रेलवे देश के रेल नेटवर्क को बेहतर करने की तैयारी में है. इसके लिए सरकार ने वंदे भारत ट्रेनों के बड़े विस्तार की योजना बनाई है. वंदे भारत भारत की पहली पूरी तरह स्वदेशी तकनीक से डिजाइन और निर्मित सेमी-हाई-स्पीड ट्रेन है, जो अपनी तेज रफ्तार, एडवांस लुक और आरामदायक सुविधाओं के कारण बहुत कम समय में यात्रियों के बीच पॉपुलर हो गया. फिलहाल देश में 164 वंदे भारत ट्रेन सेवाएं चल रही हैं, लेकिन सरकार का लक्ष्य इससे कहीं बड़ा है. योजना के मुताबिक 2030 तक 800 वंदे भारत ट्रेनसेट और 2047 तक करीब 4,500 ट्रेनसेट देशभर में चलाने का लक्ष्य रखा गया है.

बेहतर कनेक्टिविटी के साथ रेलवे शेयर पर भी नजर

इस बड़े विस्तार से शहरों के बीच कनेक्टिविटी बेहतर होगी, यात्रा का समय कम होगा और भारतीय रेलवे की पैसेंजर सेवाएं पूरी तरह आधुनिक रूप में सामने आएंगी. इन ट्रेनों में क्षेत्रीय स्वाद के अनुसार भोजन, बायो-वैक्यूम टॉयलेट, आरामदायक एर्गोनॉमिक सीटें, सीसीटीवी निगरानी और कवच (KAVACH) जैसी एडवांस टक्कर रोकने वाली सेफ्टी सिस्टम शामिल की जा रही है.

वंदे भारत के इस विशाल विस्तार से रेलवे से जुड़ी कई कंपनियों को भी बड़ा फायदा मिलने की उम्मीद है. खासतौर पर वे कंपनियां, जिन्हें पहले भी वंदे भारत ट्रेन प्रोजेक्ट से जुड़े ऑर्डर मिल चुके हैं और जो आगे भी नए कॉन्ट्रैक्ट हासिल कर रही हैं. जैसे-जैसे सरकार 2047 तक 4,500 वंदे भारत ट्रेनसेट के लक्ष्य की ओर बढ़ रही है, वैसे-वैसे ये कंपनियां भारत के सेमी-हाई-स्पीड रेल मॉडर्नाइजेशन अभियान का अहम हिस्सा बनती जा रही हैं.

BEML

बेंगलुरु स्थित सार्वजनिक क्षेत्र की कंपनी BEML भारतीय रेलवे के एडवांसमेंट में लीडिंग भूमिका निभा रही है. BEML ने भारत की पहली वंदे भारत स्लीपर ट्रेन को पूरी तरह अपने दम पर डिजाइन और विकसित किया, जो अपने आप में एक बड़ी उपलब्धि है, क्योंकि इस तरह के स्लीपर ट्रेन का पहले कोई तैयार मॉडल मौजूद नहीं था. कंपनी ने वित्त वर्ष 2025 में पहली स्लीपर ट्रेनों की सप्लाई की और उनके ट्रायल भी सफलतापूर्वक पूरे किए.

इसके बाद जनवरी 2026 में देश की पहली वंदे भारत स्लीपर एक्सप्रेस को आधिकारिक तौर पर शुरू किया गया. इस लंबी दूरी की पूरी तरह वातानुकूलित रात में चलने वाली ट्रेन के लिए 10 ट्रेनसेट के डिजाइन और विकास की जिम्मेदारी BEML को सौंपी गई, जिससे कंपनी की तकनीकी कैपेसिटी और मजबूत हुई है.

BEML और Titagarh Rail Systems की साझेदारी

वंदे भारत ट्रेनों की इलेक्ट्रिक ताकत का जिम्मा भारत हेवी इलेक्ट्रिकल्स लिमिटेड (BHEL) संभाल रहा है. इलेक्ट्रिक ट्रैक्शन सिस्टम और प्रोपल्शन टेक्नोलॉजी में अपनी विशेषज्ञता के चलते BHEL इस प्रोजेक्ट की रीढ़ बन चुका है. Titagarh Rail Systems के साथ साझेदारी में BHEL को 2029 तक 80 वंदे भारत स्लीपर ट्रेनों की सप्लाई की जिम्मेदारी मिली है, जिसकी अनुमानित कीमत करीब 24,000 करोड़ रुपये है.

इन ट्रेनों के लिए ट्रांसफॉर्मर कोलकाता में फाइनल असेंबली के लिए भेजे जा रहे हैं, जबकि ट्रैक्शन मोटर जैसे अहम कंपोनेंट BHEL की भोपाल यूनिट में विकसित किए गए हैं. ये ट्रेनें 160 किलोमीटर प्रति घंटे की रफ्तार से चलने के लिए तैयार की जा रही हैं और इनकी डिजाइन क्षमता 180 किलोमीटर प्रति घंटे तक की है, जिससे आधुनिक रेलवे इंफ्रास्ट्रक्चर में BHEL की भूमिका और मजबूत होती जा रही है.

इस कंपनी के साथ है Titagarh Rail

प्राइवेट सेक्टर की कंपनी Titagarh Rail Systems Ltd (TRSL) भी वंदे भारत प्रोजेक्ट में एक बड़े खिलाड़ी के तौर पर उभर कर सामने आई है. कंपनी ने अपनी सप्लाई चेन को मजबूत करने के लिए Ramkrishna Forgings के साथ मिलकर फोर्ज्ड व्हील मैन्युफैक्चरिंग में कदम रखा है. इससे पहले व्हीलसेट की कमी की वजह से प्रोडक्शन प्रभावित हो रहा था, जिसे अब इस जॉइंट वेंचर के जरिए दूर किया जा रहा है.

30 सितंबर 2025 तक इस संयुक्त उद्यम का कुल मूल्यांकन 13,326 करोड़ रुपये आंका गया, जिसमें BHEL ने वंदे भारत प्रोजेक्ट के लिए करीब 7,026 करोड़ रुपये का योगदान दिया, जबकि Ramkrishna Forgings ने व्हीलसेट सप्लाई के लिए 6,300 करोड़ रुपये का निवेश किया. यह साझेदारी भारतीय रेलवे के लिए जरूरी महत्वपूर्ण कंपोनेंट्स को समय पर उपलब्ध कराने में मदद कर रही है.

Ramkrishna Forgings Ltd की भूमिका

Ramkrishna Forgings Limited (RKFL) वंदे भारत स्लीपर ट्रेनों के लिए अहम पार्ट्स की सप्लाई में महत्वपूर्ण भूमिका निभा रही है. कंपनी बोगी फ्रेम, बोगी बोल्स्टर और स्क्रू कपलिंग जैसे जरूरी कंपोनेंट्स का निर्माण करती है. वर्ष 2024 में RKFL को 270 करोड़ रुपये का ऑर्डर मिला, जिसके तहत उसे 32 वंदे भारत ट्रेनसेट के लिए कंपोनेंट्स सप्लाई करने थे.

हर ट्रेन में 16 कोच होते हैं, इस हिसाब से कुल 1,024 बोगी फ्रेम की सप्लाई का जिम्मा कंपनी को मिला. बड़े पैमाने पर सटीक और उच्च गुणवत्ता वाला निर्माण करने की क्षमता के कारण RKFL इस सेमी-हाई-स्पीड ट्रेन प्रोग्राम का अहम साझेदार बना हुआ है और आगे भी बढ़ती मांग से इसे फायदा मिलने की संभावना है.

Rail Vikas Nigam Ltd भी पीछे नहीं!

रेल मंत्रालय की निर्माण शाखा Rail Vikas Nigam Limited (RVNL) भी वंदे भारत विस्तार से बड़े स्तर पर फायदा उठाने की स्थिति में है. Transmashholding की सब्सिडियरी और Locomotive Electronic Systems के साथ मिलकर बनाई गई जॉइंट वेंचर कंपनी Kinet Railway Solutions Ltd (KRSL) के जरिए RVNL को 120 वंदे भारत इलेक्ट्रिक स्लीपर ट्रेनों के निर्माण, आपूर्ति और 35 साल तक रखरखाव की जिम्मेदारी मिली है. इससे पहले TMH-RVNL कंसोर्टियम को 58,000 करोड़ रुपये के 200 स्लीपर ट्रेनों के प्रोजेक्ट में L1 स्टेटस भी मिल चुका है. इसके अलावा RVNL मेट्रो लाइन डेवलपमेंट और अन्य रणनीतिक साझेदारियों में भी तेजी से विस्तार कर रहा है.

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डिस्क्लेमर: Money9live किसी स्टॉक, म्यूचुअल फंड, आईपीओ में निवेश की सलाह नहीं देता है. यहां पर केवल स्टॉक्स की जानकारी दी गई है. निवेश से पहले अपने वित्तीय सलाहकार की राय जरूर लें.