AI वीडियो में ट्रंप की आवाज और चेहरा… मगर स्कीम थी फ्रॉड, 200 भारतीय हुए ठगी के शिकार; जानिए पूरा खेल
एक वायरल वीडियो, एक चर्चित चेहरा, और हर दिन कमाई का वादा... और फिर जो हुआ, उसने सबको हिला दिया. लोग समझ ही नहीं पाए कि असली और नकली में फर्क कहां मिट गया. कर्नाटक के कई शहरों में एक जैसे मामले सामने आ रहे हैं, जहां लोग लाखों गंवा चुके हैं.
Donald Trump Deepfake Video: कर्नाटक में बीते कुछ महीनों के दौरान 200 से ज्यादा लोग एक बेहद चौंकाने वाले साइबर फ्रॉड के शिकार हो गए हैं. ठगों ने इस बार अमेरिकी पूर्व राष्ट्रपति डोनाल्ड ट्रंप की AI-जनरेटेड वीडियो का सहारा लेकर एक फर्जी इन्वेस्टमेंट स्कीम चलाई और लोगों को ‘ट्रंप होटल रेंटल्स’ में पैसा लगाने को कहा. वादा किया गया कि यहां निवेश करने पर मोटा मुनाफा मिलेगा, लेकिन हुआ इसके उलट. लोगों की गाढ़ी कमाई लुट गई.
कैसे बिछाया जाल?
इस ठगी में सबसे खतरनाक और आकर्षक तरीका था डोनाल्ड ट्रंप की AI से बनी हुई वीडियो. डोनाल्ड ट्रंप को यह कहते हुए दिखाया जाता है कि भारत में कोई भी व्यक्ति “Trump Hotel Rentals” में निवेश करके मोटा मुनाफा कमा सकता है. इस वीडियो को यूट्यूब शॉर्ट्स और सोशल मीडिया प्लेटफॉर्म्स पर चलाया गया, ताकि लोगों को यह भरोसा दिलाया जा सके कि अमेरिकी राष्ट्रपति से जुड़ी यह स्कीम असली है. वीडियो के नीचे दिए गए लिंक पर क्लिक करते ही एक मोबाइल ऐप डाउनलोड करवाया गया, जिसमें यूजर से फॉर्म भरवाकर बैंक अकाउंट और IFSC कोड समेत सारी डिटेल मांगी गईं. शुरुआत में 1,500 रुपये की मामूली रकम जमा करने को कहा गया और इसके बदले यूजर को हर दिन 30 रुपये उनके ऐप प्रोफाइल में दिखाए जाने लगे.
इस ‘कमाई’ को बढ़ता देख लोगों ने ज्यादा निवेश करना शुरू किया. 5,000 से लेकर 1 लाख रुपये तक के इन्वेस्टमेंट किए गए, लेकिन जब भी पैसे निकालने की बारी आई तो टैक्स या अन्य फीस के नाम पर और पैसा मांगा गया और आखिर में न पैसा मिला, न रिटर्न.
पुलिस के मुताबिक इस फर्जीवाड़े की रिपोर्ट बेंगलुरु, टुमकुरु, मंगलुरु और हावेरी जैसे शहरों से दर्ज की गई है. अकेले हावेरी जिले में ही अब तक 15 से ज्यादा लोग इस जाल में फंस चुके हैं.
वकील ने गंवाए 5.93 लाख, अब जांच में जुटी है पुलिस
38 वर्षीय एक वकील ने इंडियन एक्सप्रेस के हवाले से बताया कि उन्होंने जनवरी से अप्रैल के बीच करीब 5.93 लाख रुपये इस स्कीम में गंवा दिए. शुरुआत में रोज मिलने वाले छोटे रिटर्न ने उन्हें भरोसे में ले लिया. बाद में ठगों ने उन्हें बड़े रिटर्न का लालच देकर और पैसे ऐंठ लिए.अब हावेरी की साइबर क्राइम इकाई इस पूरे मामले की जांच कर रही है और अन्य पीड़ितों से भी संपर्क किया जा रहा है.
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ये मामला एक बार फिर से ये दिखाता है कि इंटरनेट पर दिखने वाला हर विज्ञापन या स्कीम सही नहीं होती. खासकर जब वह किसी नामी शख्सियत के नाम से जुड़ी हो, तो दोहरी जांच जरूरी हो जाती है.
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