जनवरी में कार बाजार का बदला खेल, टॉप 10 में 6 मारुति, लेकिन नंबर वन बनी टाटा; देखें पूरी लिस्ट

टॉप 10 की लिस्ट में अब भी मारुति के 6 मॉडल मौजूद हैं, लेकिन नंबर एक बनने का ताज टाटा नेक्सॉन के सिर सजा. इससे साफ है कि अब ग्राहक सिर्फ ब्रांड नहीं, बल्कि सेफ्टी, फीचर्स और SUV जैसी बॉडी स्टाइल को ज्यादा अहमियत दे रहे हैं. बाजार में SUV और क्रॉसओवर गाड़ियों की मांग तेजी से बढ़ रही है, जबकि हैचबैक और सेडान जैसी पुरानी पसंद धीरे-धीरे दबाव में आ रही हैं.

Tata Nexon और Maruti Brezza Image Credit: money9live

Car sales: जनवरी महीने में भारत के कार बाजार में बड़ा उलटफेर देखने को मिला. जहां सालों से मारुति की गाड़ियां बिक्री के चार्ट में सबसे ऊपर रहती थीं, वहीं इस बार टॉप पोजीशन टाटा ने अपने नाम कर ली. हालांकि टॉप 10 की लिस्ट में अब भी मारुति के 6 मॉडल मौजूद हैं, लेकिन नंबर एक बनने का ताज टाटा नेक्सॉन के सिर सजा. इससे साफ है कि अब ग्राहक सिर्फ ब्रांड नहीं, बल्कि सेफ्टी, फीचर्स और SUV जैसी बॉडी स्टाइल को ज्यादा अहमियत दे रहे हैं. बाजार में SUV और क्रॉसओवर गाड़ियों की मांग तेजी से बढ़ रही है, जबकि हैचबैक और सेडान जैसी पुरानी पसंद धीरे-धीरे दबाव में आ रही हैं.

पहले नंबर पर टाटा नेक्सॉन

जनवरी 2026 में सबसे ज्यादा बिकने वाली कारों की लिस्ट में टाटा नेक्सॉन पहले नंबर पर रही. इसने कुल 23,365 यूनिट्स बेचीं. यह लंबे समय बाद पहली बार हुआ है जब मारुति के अलावा किसी दूसरी कंपनी की कार बिक्री में सबसे ऊपर पहुंची हो. दूसरे नंबर पर मारुति डिजायर रही. इसकी 19,629 यूनिट्स बिकीं. दोनों के बीच करीब 3,700 गाड़ियों का अंतर रहा, जो काफी बड़ा माना जाता है.

Nexon की इस सफलता की वजह इसके पेट्रोल और डीजल वेरिएंट के साथ-साथ इलेक्ट्रिक मॉडल की मजबूत मांग है. जनवरी में टाटा की कुल इलेक्ट्रिक कार बिक्री 9,052 यूनिट्स रही, जिसमें बड़ी हिस्सेदारी नेक्सॉन ईवी की मानी जा रही है. इसकी कीमत, सेफ्टी फीचर्स और अंदर मिलने वाली सुविधाएं ग्राहकों को आकर्षित कर रही हैं.

डिजायर दूसरे नंबर पर रही

वहीं मारुति भले ही नंबर वन न बन पाई हो, लेकिन उसकी ताकत उसकी बड़ी रेंज में दिखी. टॉप 10 में उसके छह मॉडल शामिल रहे. डिजायर दूसरे नंबर पर रही. पांचवें नंबर पर अर्टिगा रही, जिसकी 17,892 यूनिट्स बिकीं. छठे नंबर पर स्विफ्ट रही, जिसकी 17,806 यूनिट्स गईं. सातवें नंबर पर ब्रेजा रही, जिसकी 17,486 यूनिट्स बिकीं. आठवें नंबर पर बलेनो रही, जिसकी 16,782 यूनिट्स बिकीं. दसवें नंबर पर नई विक्टोरिस रही, जिसने 15,240 यूनिट्स के साथ शानदार एंट्री की.

इन छह मारुति कारों ने मिलकर जनवरी में 1,04,835 यूनिट्स की बिक्री की. यह आंकड़ा टाटा की नेक्सॉन और पंच की कुल 42,622 यूनिट्स से कहीं ज्यादा है. इससे साफ है कि मारुति अब भी कुल बिक्री के मामले में मजबूत है. डिजायर का प्रदर्शन खास माना जा रहा है, क्योंकि यह स्विफ्ट से महंगी होने के बावजूद ज्यादा बिकी. इसका बड़ा कारण टैक्सी और फ्लीट से आने वाली मांग है, जहां ज्यादा बूट स्पेस और सेडान बॉडी इसे पसंदीदा बनाती है. इसके साथ ही आम ग्राहक भी इसे इसकी मजबूती और अच्छे रीसेल वैल्यू के कारण खरीद रहे हैं.

रैंककार मॉडलकंपनीबिक्री (यूनिट्स)
1NexonTata Motors23,365
2DzireMaruti Suzuki19,629
3PunchTata Motors19,257
4CretaHyundai Motor India17,921
5ErtigaMaruti Suzuki17,892
6SwiftMaruti Suzuki17,806
7BrezzaMaruti Suzuki17,486
8BalenoMaruti Suzuki16,782
9ScorpioMahindra & Mahindra15,542
10VictorisMaruti Suzuki15,240

तीसरे नंबर पर टाटा पंच रही

तीसरे नंबर पर टाटा पंच रही, जिसकी 19,257 यूनिट्स बिकीं. यह डिजायर से सिर्फ 372 यूनिट्स पीछे रही. छोटी एसयूवी होने के बावजूद पंच की बिक्री बताती है कि लोग अब हैचबैक छोड़कर ऊंची सीटिंग और एसयूवी लुक वाली कारों की ओर बढ़ रहे हैं. चौथे नंबर पर हुंडई क्रेटा रही, जिसकी 17,921 यूनिट्स बिकीं. यह आंकड़ा अच्छा है, लेकिन नेक्सॉन और पंच से पीछे रहना बाजार में बदलते समीकरणों की तरफ इशारा करता है. टाटा की आक्रामक कीमत और सेफ्टी पर जोर ने मुकाबला कड़ा कर दिया है.

नौवें नंबर पर महिंद्रा स्कॉर्पियो

नौवें नंबर पर महिंद्रा स्कॉर्पियो रही, जिसकी 15,542 यूनिट्स बिकीं. इसमें स्कॉर्पियो एन और स्कॉर्पियो क्लासिक दोनों शामिल हैं. यह महंगी रेंज में होने के बावजूद मजबूत मांग दिखाती है, खासकर छोटे शहरों में जहां इसे रुतबे की गाड़ी माना जाता है.
नई विक्टोरिस ने भी बाजार में तेजी से जगह बनाई है. लॉन्च के पांच महीने में ही इसकी कुल बिक्री 50,000 के पार पहुंच चुकी है. इससे पता चलता है कि मारुति की डीलरशिप नेटवर्क और ब्रांड ताकत अब भी काम कर रही है.

अगर पूरी टॉप 10 लिस्ट देखें तो साफ है कि एसयूवी और क्रॉसओवर गाड़ियों का दबदबा बढ़ता जा रहा है. हैचबैक और सेडान की हिस्सेदारी घट रही है. जनवरी के आंकड़े बताते हैं कि अब आधे से ज्यादा यात्री वाहन बिक्री एसयूवी से आ रही है. इन नंबरों से साफ है कि मारुति के पास अभी भी बड़ी मौजूदगी है, लेकिन टाटा ने नेक्सॉन के दम पर कहानी अपने नाम कर ली है. आने वाले महीनों में यही देखना दिलचस्प होगा कि यह बदलाव स्थायी साबित होता है या फिर बाजार फिर से कोई नया मोड़ लेता है.

इसे भी पढ़ें- Black Sunday: बजट नहीं आया बाजार को रास! सेंसेक्स 1500 अंकों से ज्यादा टूटा; निवेशकों के डूबे ₹10 लाख करोड़