नौकरी चली गई… लेकिन EMI अभी बाकी, ये फैसले बचा सकते हैं आपकी आर्थिक जिंदगी; ऐसे करें समझदारी भरी प्लानिंग

नौकरी जाने के बाद सबसे पहला काम है अपने पैसों की स्थिति को समझना. आपको यह देखना चाहिए कि आपकी सेविंग्स, इमरजेंसी फंड और अगर कोई सेवरेंस पे मिली है, तो वह कितने महीने तक आपकी EMI चला सकती है. इसके बाद गैर-जरूरी खर्च तुरंत बंद कर दें.

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JOB LOSS: नौकरी जाना सिर्फ करियर का झटका नहीं होता, यह इंसान की पूरी जिंदगी को हिला देता है. सबसे पहले मानसिक तनाव बढ़ता है और उसके तुरंत बाद घर का बजट बिगड़ने लगता है. हालात और मुश्किल तब हो जाते हैं, जब हर महीने पर्सनल लोन की EMI चुकानी हो. ऐसे समय में घबराने के बजाय सही और समय पर फैसला लेना बेहद जरूरी होता है. अगर शुरुआत में ही सही प्लान बना लिया जाए, तो न सिर्फ EMI का बोझ संभाला जा सकता है, बल्कि क्रेडिट स्कोर को भी खराब होने से बचाया जा सकता है.

सबसे पहले हालात का सही अंदाजा लगाएं

नौकरी जाने के बाद सबसे पहला काम है अपने पैसों की स्थिति को समझना. आपको यह देखना चाहिए कि आपकी सेविंग्स, इमरजेंसी फंड और अगर कोई सेवरेंस पे मिली है, तो वह कितने महीने तक आपकी EMI चला सकती है. इसके बाद गैर-जरूरी खर्च तुरंत बंद कर दें. बाहर खाना, ऑनलाइन शॉपिंग और मनोरंजन जैसे खर्चों से दूरी बनाएं. एक बेहद सादा बजट बनाएं, जिसमें सिर्फ जरूरी खर्च जैसे किराया, बिजली-पानी के बिल और EMI शामिल हों. हर हफ्ते यह देखें कि पैसा कहां जा रहा है और कहां से आ रहा है.

बैंक या लेंडर से जल्दी बात करें

EMI मिस होने से पहले बैंक से संपर्क करना बहुत जरूरी है. अक्सर बैंक और NBFC समय पर बात करने वाले ग्राहकों को राहत देने के लिए तैयार रहते हैं. आप EMI टालने यानी मोराटोरियम, कुछ समय के लिए सिर्फ ब्याज भरने या लोन की अवधि बढ़ाने का अनुरोध कर सकते हैं. अगर नौकरी ढूंढने में ज्यादा समय लग रहा है, तो आप लोन री-स्ट्रक्चरिंग की मांग भी कर सकते हैं. इससे पेनल्टी, अतिरिक्त ब्याज और क्रेडिट स्कोर खराब होने से बचा जा सकता है.

आमदनी दोबारा शुरू होने तक EMI संभालने का तरीका

अगर थोड़ा-बहुत पैसा आ रहा है, तो कोशिश करें कि पूरी EMI न सही, लेकिन आंशिक भुगतान करते रहें. इससे ब्याज का बोझ धीरे-धीरे कम होगा. अगर कहीं कम ब्याज दर पर लोन ट्रांसफर का विकल्प मिले, तो फीस और शर्तें समझकर उस पर विचार किया जा सकता है. फ्रीलांसिंग, पार्ट-टाइम काम या छोटे प्रोजेक्ट से आय बढ़ाने की कोशिश करें, ताकि EMI चलती रहे.

किन जोखिमों से बचना जरूरी है

पर्सनल लोन बिना किसी गारंटी के होते हैं, इसलिए इन पर ब्याज ज्यादा होता है. EMI मिस करने पर भारी जुर्माना लग सकता है और रिकवरी कॉल्स शुरू हो सकती हैं. लगातार चूक होने पर कानूनी परेशानी भी खड़ी हो सकती है. लोन री-स्ट्रक्चरिंग से EMI तो कम होती है, लेकिन कुल ब्याज बढ़ जाता है, यह बात हमेशा ध्यान में रखें. नौकरी जाना मुश्किल दौर होता है, लेकिन सही प्लानिंग से इसे संभाला जा सकता है.

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