9 महीने में पहली बार 200-डे EMA के नीचे फिसला Nifty, बजट से पहले एनालिस्ट ने किया सतर्क, जानें चार्ट का इशारा?
निफ्टी में हालिया रिकॉर्ड हाई के बाद तेज करेक्शन देखने को मिला है और टेक्निकल चार्ट कमजोरी के साफ संकेत दे रहे हैं. 200-डे ईएमए के नीचे फिसलना और ब्रॉडर मार्केट में बिकवाली से बजट से पहले जोखिम बढ़ गया है. एक्सपर्ट फिलहाल सतर्क रहने और नई खरीद से बचने की सलाह दे रहे हैं.
शेयर बाजार के चार्ट अब साफ तौर पर कमजोरी के संकेत दे रहे हैं और निवेशकों के लिए आने वाले दिन चुनौतीपूर्ण हो सकते हैं. हालिया तेजी के बाद निफ्टी में जिस तरह की तेज गिरावट आई है उसने बाजार में डर और सतर्कता दोनों बढ़ा दी है. अगर हालात नहीं संभले, तो बजट से पहले बाजार पर दबाव और गहरा सकता है. ये बातें एसबीआई सिक्योरिटीज के टेक्निकल एंड डेरिवेटिव्स रिसर्च हेड सुदीप शाह ने कही हैं. उनका मानना है कि इस समय सतर्क रणनीति अपनाना बेहतर रहेगा. उन्होंने आने वाले हफ्ते को लेकर निवेशकों को सलाह दी है कि वे साइडलाइन पर रहें. कैपिटल की सुरक्षा को प्राथमिकता दें और बजट भाषण के बाद, जब नीतिगत दिशा और बाजार सेंटिमेंट पर ज्यादा स्पष्टता मिले, तभी नई पोजिशन पर विचार करें. उन्होंने आगे कहा, “चार्ट अपना टोन बदल रहे है, क्या आप संकेत समझ रहे हैं?”
फ्रंटलाइन शेयरों में व्यापक दबाव
सुदीप शाह के अनुसार, हालिया रिकॉर्ड हाई से निफ्टी महज 11 ट्रेडिंग सेशंस में 5% से ज्यादा टूट चुका है जो हाल के महीनों की सबसे तेज गिरावट में से एक है. बुधवार को इंडेक्स ने 24,900 के आसपास सपोर्ट लेकर हल्की रिकवरी की कोशिश की, लेकिन इसमें दम नहीं दिखा और शुक्रवार को एक बार फिर बिकवाली हावी हो गई. इस गिरावट की अगुवाई इंडेक्स के दिग्गज शेयरों की कमजोरी ने की है. महीने की शुरुआत से अब तक रिलायंस इंडस्ट्रीज करीब 12% टूट चुका है, एचडीएफसी बैंक में 7.58% की गिरावट आई है, आईटीसी लगभग 20% करेक्ट हुआ है, एलएंडटी 8.32% फिसला है और भारती एयरटेल में करीब 6% की कमजोरी दर्ज की गई है. इससे साफ है कि फ्रंटलाइन शेयरों में व्यापक दबाव बना हुआ है.
अप्रैल 2025 के बाद पहली बार 200-डे ईएमए के नीचे फिसला निफ्टी
सुदीप शाह ने बताया कि टेक्निकल मोर्चे पर एक बड़ा नेगेटिव संकेत यह है कि निफ्टी अप्रैल 2025 के बाद पहली बार अपने 200-डे ईएमए के नीचे फिसल गया है. इसके साथ ही वीकली चार्ट पर एक बड़ा बेयरिश कैंडल बना है और मोमेंटम इंडिकेटर्स भी कमजोर बने हुए हैं. वीकली आरएसआई करीब 45 के स्तर पर है, जो अप्रैल 2025 के बाद का सबसे निचला स्तर है और यह अपने 9-वीक एवरेज से भी नीचे ट्रेड कर रहा है जो ट्रेंड में कमजोरी की पुष्टि करता है.
उन्होंने कहा कि ब्रॉडर मार्केट में हालात और ज्यादा खराब नजर आ रहे हैं. निफ्टी मिडकैप 100 और निफ्टी स्मॉलकैप 100 दोनों में पिछले एक हफ्ते में तेज गिरावट देखने को मिली है. मिडकैप 100 अपने 200-डे ईएमए के नीचे चला गया है, जबकि स्मॉलकैप 100 इस लंबे समय के एवरेज से 7% से ज्यादा नीचे ट्रेड कर रहा है. यह संकेत देता है कि बाजार में बिकवाली सिर्फ चुनिंदा शेयरों तक सीमित नहीं है, बल्कि पूरे ब्रॉडर यूनिवर्स में दबाव बना हुआ है.
निफ्टी के लिए अहम लेवल
एनालिस्ट के अनुसार, 25,400 से 25,450 का जोन निफ्टी के लिए अहम रेजिस्टेंस बना हुआ है. जब तक इंडेक्स 25,450 के नीचे बना रहता है, तब तक नीचे की ओर जोखिम ऊंचा रहेगा. वहीं, तत्काल सपोर्ट 24,800 के आसपास है और इसके बाद 24,600 अगला महत्वपूर्ण स्तर माना जा रहा है.
आगामी हफ्ते के लिए अहम ट्रिगर
आने वाले हफ्ते में जियो-पॉलिटिकल मुद्दे जैसे अमेरिका के राष्ट्रपति डोनाल्ड ट्रंप की भारत के साथ संभावित अनुकूल ट्रेड डील को लेकर टिप्पणियां, शॉर्ट-टर्म सेंटीमेंट को प्रभावित कर सकती हैं और हल्की राहत भरी तेजी को ट्रिगर कर सकती हैं. हालांकि, ऐसी तेजी अक्सर हेडलाइन-ड्रिवन होती है और ठोस नीतिगत कदमों के बिना इसका असर आमतौर पर अल्पकालिक रहता है. सुदीप शाह को कहना है कि बाजार की दिशा तय करने में घरेलू कंपनियों के नतीजे सबसे अहम भूमिका निभाते रहेंगे. ग्रोथ, प्रॉफिटेबिलिटी और सेक्टर लीडरशिप पर अर्निंग्स का सीधा असर पड़ता है और यही घरेलू व विदेशी निवेश के टिकाऊ फ्लो को तय करते हैं. हालिया बाजार गतिविधि से यह साफ है कि जब नतीजे उम्मीद से कमजोर रहते हैं या मैनेजमेंट गाइडेंस सतर्क होता है, तो पॉजिटिव ग्लोबल संकेत भी जल्दी बेअसर हो जाते हैं.
बजट से पहले निवेशकों को अपनी पोजिशन किस प्रकार बनानी चाहिए
सुदीप शाह के मुताबिक, शॉर्ट टर्म में भले ही ग्लोबल घटनाक्रम ओपनिंग मूव्स को प्रभावित करें, लेकिन असली फॉलो-थ्रू अर्निंग्स और घरेलू मैक्रो हालात से तय होगा. ऐसे में ग्लोबल खबरों का इस्तेमाल ट्रेडिंग के लिहाज से रणनीतिक तौर पर किया जा सकता है, जबकि मीडियम टर्म पोजिशनिंग को मजबूत अर्निंग्स और सेक्टर-स्पेसिफिक फंडामेंटल्स पर आधारित रखना ज्यादा सही माना जा रहा है. मौजूदा टेक्निकल तस्वीर को देखते हुए न केवल फ्रंटलाइन इंडेक्स बल्कि ब्रॉडर मार्केट में भी साफ कमजोरी दिख रही है, जो बाजार के अहम सेगमेंट्स में ताकत की कमी को दर्शाता है. यूनियन बजट 2026 से पहले वोलैटिलिटी बढ़ने की संभावना को देखते हुए फिलहाल नए लॉन्ग पोजिशन बनाने का माहौल अनुकूल नहीं माना जा रहा है.
डीआईआई & एफआईआई
शाह बोले कि 25,000 के स्तर पर डीआईआई द्वारा एफआईआई की बिकवाली के दबाव को कितनी मजबूती से संभाला जा सकेगा, यह अभी पूरी तरह स्पष्ट नहीं है. हालांकि, हालिया इतिहास बताता है कि घरेलू निवेशकों की मजबूत खरीदारी ने कई बार विदेशी निवेशकों की लगातार बिकवाली के बावजूद बाजार को बड़े टूटने से बचाया है. जुलाई 2025 से अब तक लगातार एफआईआई सेलिंग के बावजूद घरेलू फ्लो ने बाजार को सहारा दिया है, जिससे बड़ी गिरावट टलती रही है.
Sensex
सुदीप शाह ने कहा है कि वीकली चार्ट पर एक बड़ा बेयरिश कैंडल बना है. पिछले 13 ट्रेडिंग सेशंस में सेंसेक्स करीब 5% फिसल चुका है, जो हालिया अवधि की सबसे तेज गिरावट मानी जा रही है. खास बात यह है कि अप्रैल 2025 के बाद पहली बार सेंसेक्स अपने 200-डे ईएमए के नीचे आ गया है, जो मीडियम टर्म मोमेंटम में बदलाव का संकेत देता है.
आगे की चाल की बात करें तो 82,700 से 82,800 का जोन सेंसेक्स के लिए तत्काल और अहम रुकावट (रेजिस्टेंस) के रूप में काम कर सकता है. इस स्तर के ऊपर टिकाऊ मजबूती आने पर ही मौजूदा कमजोरी पर ब्रेक लग सकता है. वहीं, नीचे की ओर 81,100 का स्तर बेहद अहम सपोर्ट माना जा रहा है. अगर सेंसेक्स इस स्तर के नीचे निर्णायक रूप से फिसलता है, तो बिकवाली का दबाव और तेज हो सकता है, जिससे इंडेक्स 80,500 तक और इसके बाद शॉर्ट टर्म में 79,900 तक भी फिसल सकता है.
डिस्क्लेमर: Money9live किसी स्टॉक, म्यूचुअल फंड, आईपीओ में निवेश की सलाह नहीं देता है. यहां पर केवल स्टॉक्स की जानकारी दी गई है. निवेश से पहले अपने वित्तीय सलाहकार की राय जरूर लें.
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