भारत का ‘डेट मार्केट’: शेयर मार्केट जितना ग्लैमरस नहीं, लेकिन अर्थव्यवस्था की असली रीढ़
हम अक्सर शेयर बाजार की खबरें सुनते हैं कभी Sensex की उड़ान तो कभी किसी कंपनी के शेयरों का गोता. लेकिन इसके बीच एक ऐसा मार्केट भी है जो भले ही सुर्खियों में कम रहता है, मगर देश की अर्थव्यवस्था की रीढ़ माना जाता है वो है डेट मार्केट या बॉन्ड मार्केट. दरअसल, जब सरकार या कंपनियों को पैसों की जरूरत होती है, तो वे जनता से उधार लेती हैं और बदले में बॉन्ड सर्टिफिकेट जारी करती हैं. इसमें तय ब्याज दर और अवधि लिखी होती है. यानी, जब आप बॉन्ड खरीदते हैं, तो आप सरकार या कंपनी को पैसा उधार देते हैं और उस पर ब्याज कमाते हैं. हालांकि, भारत में अभी भी बॉन्ड मार्केट में निवेश करने वाले लोगों की संख्या बहुत कम है. आम निवेशक इसे “धीमा और कम रिटर्न” वाला विकल्प मानते हैं, जबकि हकीकत यह है कि यह मार्केट देश की वित्तीय स्थिरता के लिए बेहद अहम है. लेकिन कम निवेशकों के कारण इसमें लिक्विडिटी यानी लेनदेन सीमित रहता है और यही वजह है कि भारत का बॉन्ड मार्केट अभी भी अपनी असली चमक से दूर है. आइए इसके बारे में विस्तार से बताते हैं.
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