गाजा शांति मिशन में भारत की एंट्री! ट्रंप ने बोर्ड में शामिल होने का दिया निमंत्रण, जानें क्या है बोर्ड ऑफ पीस
अमेरिकी राष्ट्रपति डोनाल्ड ट्रंप ने गाजा संकट के समाधान के लिए प्रस्तावित बोर्ड ऑफ पीस में भारत को शामिल होने का निमंत्रण दिया है यह पहल अमेरिका की नई शांति योजना का हिस्सा है जिसका उद्देश्य गाजा संघर्ष को समाप्त करना है इस बोर्ड की अध्यक्षता ट्रंप करेंगे और इसमें कई वैश्विक नेता शामिल हैं.
Donald Trump peace plan: अमेरिका के राष्ट्रपति डोनाल्ड ट्रंप ने गाजा संकट के समाधान के लिए प्रस्तावित बोर्ड ऑफ पीस में भारत को शामिल होने का न्योता दिया है. यह पहल अमेरिका की व्यापक शांति योजना का हिस्सा है, जिसका उद्देश्य गाजा में जारी संघर्ष को समाप्त करने की दिशा में ठोस कदम उठाना है. अमेरिकी प्रशासन का कहना है कि यह मंच पहले से मौजूद संस्थाओं की तुलना में अधिक प्रभावी और तेजी से फैसले लेने में सक्षम होगा. हालांकि इस प्रस्ताव को लेकर कई देशों ने सतर्क रुख अपनाया है. भारत सरकार की ओर से फिलहाल कोई आधिकारिक बयान सामने नहीं आया है.
बोर्ड ऑफ पीस क्या है
बोर्ड ऑफ पीस को एक नए अंतरराष्ट्रीय शांति मंच के रूप में तैयार किया गया है, जो सबसे पहले गाजा संघर्ष पर काम करेगा. इसके बाद इसका दायरा अन्य वैश्विक विवादों तक बढ़ाया जा सकता है. व्हाइट हाउस के अनुसार यह बोर्ड जमीन पर शांति प्रयासों को तेजी से आगे बढ़ाने के लिए बनाया गया है. अमेरिकी प्रशासन का मानना है कि मौजूदा अंतरराष्ट्रीय स्ट्रक्चर की तुलना में यह पहल अधिक लचीली और बेहतर परिणाम देने वाली होगी.
डोनाल्ड ट्रंप की केंद्रीय भूमिका
प्रस्तावित ढांचे के तहत बोर्ड ऑफ पीस की अध्यक्षता डोनाल्ड ट्रंप करेंगे. ड्राफ्ट चार्टर के मुताबिक उन्हें आजीवन चेयरमैन बनाए जाने का प्रावधान है. यह बोर्ड ट्रंप के 20 प्वाइंट शांति प्लान के दूसरे चरण की निगरानी करेगा. व्हाइट हाउस का कहना है कि ट्रंप के नेतृत्व में यह मंच शांति प्रक्रिया को नई दिशा दे सकता है. हालांकि इस व्यवस्था को लेकर वैश्विक स्तर पर बहस भी हो रही है.
बोर्ड में शामिल प्रमुख नाम
व्हाइट हाउस द्वारा जारी लिस्ट में कई चर्चित अंतरराष्ट्रीय नाम शामिल हैं. इसमें अमेरिकी विदेश मंत्री मार्को रूबियो, ब्रिटेन के पूर्व प्रधानमंत्री टोनी ब्लेयर और ट्रंप के विशेष दूत स्टीव विटकॉफ शामिल हैं. इसके अलावा वर्ल्ड बैंक के अध्यक्ष अजय बंगा, ट्रंप के दामाद जेरेड कुशनर और कई वरिष्ठ अमेरिकी अधिकारी तथा कारोबारी नेता भी इस बोर्ड का हिस्सा होंगे.
अंतरराष्ट्रीय प्रतिक्रिया और चिंताएं
इस प्रस्ताव पर यूरोप समेत कई देशों ने सतर्क प्रतिक्रिया दी है. कुछ सरकारों को आशंका है कि बोर्ड ऑफ पीस संयुक्त राष्ट्र की भूमिका को कमजोर कर सकता है. अब तक केवल हंगरी ने इस पहल को सार्वजनिक रूप से समर्थन दिया है, जबकि अन्य देशों ने इस पर कोई औपचारिक बयान नहीं दिया है. इस कारण इस मंच की वैश्विक स्वीकार्यता को लेकर सवाल उठ रहे हैं.
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भारत को औपचारिक निमंत्रण
भारत को बोर्ड ऑफ पीस में शामिल होने का औपचारिक निमंत्रण दिया गया है, जिसे भारत की बढ़ती वैश्विक कूटनीतिक भूमिका से जोड़कर देखा जा रहा है. हालांकि अब तक भारत सरकार की ओर से कोई आधिकारिक प्रतिक्रिया सामने नहीं आई है. जानकारों का मानना है कि भारत का फैसला इस पहल की दिशा और प्रभाव को काफी हद तक तय कर सकता है.
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