प्रॉपर्टी बेचने पर बचाना चाहते हैं कैपिटल गेन टैक्स? जानें ये तरीके जो बचा सकते हैं आपका पैसा
जब भी हम अपनी कोई प्रॉपर्टी बेचते हैं तो हमारा मकसद मुनाफा कमाना होता है लेकिन इस मुनाफे का कुछ हिस्सा सरकार के पास कैपिटल गेन टैक्स के रूप में चला जाता है. हालांकि, कैपिटल गेन टैक्स से बचने के कुछ उपाय मौजूद हैं, जिनका सही तरीके से इस्तेमाल करके आप बड़ी रकम टैक्स में जाने से बचा सकते हैं. आइये इसके बारे में जानते हैं.
भारत में प्रॉपर्टी की कीमतों में तेजी से बढ़ोतरी हो रही है. जहां प्रॉपर्टी खरीदारों को बढ़ती कीमतों का बोझ झेलना पड़ रहा है, वहीं इसे बेचने वालों को मुनाफे पर टैक्स चुकाना पड़ता है. इसे कैपिटल गेन टैक्स कहते हैं. प्रॉपर्टी को बेचने के समय आप कितना मुनाफा कमा रहे हैं और उस समय महंगाई कितनी बढ़ गई है. इन सब चीजों के आधार पर मुनाफे पर कैपिटल गेन टैक्स देना होता है. लेकिन कुछ तरीके हैं जिसे फॉलो करके इस टैक्स को कम किया या बचाया जा सकता है. उज्जीवन स्मॉल फाइनेंस बैंक ने इसके कुछ तरीके बताये हैं. आइये इसके बारे में जानते हैं.
कैपिटल गेन टैक्स के प्रकार
कैपिटल गेन टैक्स 2 तरह को होते हैं. एक है शॉर्ट टर्म कैपिटल गेन टैक्स (STCG) और दूसरा है लॉन्ग टर्म कैपिटल गेन टैक्स (LTCG).
जब आप कोई प्रॉपर्टी खरीदने के 2 साल होने से पहले ही उसे बेच देते हैं तो इस पर STCG लगता है. LTCG पर 20 प्रतिशत टैक्स लगता है. शॉर्ट टर्म कैपिटल गेन पर यह टैक्स आपके इनकम टैक्स स्लैब के मुताबिक लगता है. वहीं, अगर प्रॉपर्टी 24 महीने यानी 2 साल से ज्यादा समय तक होल्ड करने के बाद बेची जाताी है तो उस पर लॉन्ग-टर्म कैपिटल गेन टैक्स लगता है. LTCG पर इंडेक्सेशन लाभ के साथ 20% के फ्लैट रेट या इंडेक्सेशन लाभ के बिना 12.5 प्रतिशत की दर से टैक्स लगाया जाता है.
उज्जीवन स्मॉल फाइनेंस बैंक के अनुसार, ऐसे बचाया जा है कैपिटल गेन टैक्स
जॉइंट ऑनरशिप
यदि आप किसी अन्य व्यक्ति के साथ किसी संपत्ति के को-ऑनर हैं तो आप बिक्री से प्राप्त लाभ को को-ऑनर्स के बीच उनके स्वामित्व के हिस्से के आधार पर बांट सकते हैं. इससे प्रत्येक को-ऑनर अपनी मूल छूट सीमा का उपयोग कर सकता है. और संभावित रूप से कुल टैक्स को कम कर सकता है.
रेनोवेशन का खर्च हटाकर
रेनोवेशन के खर्च को संपत्ति की बिक्री पर हुए लाभ की गणना करते समय बिक्री मूल्य से घटाया जा सकता है जिससे टैक्स कम हो जाता है.
होल्डिंग पीरियड
किसी संपत्ति को दो साल से अधिक समय तक होल्ड करने पर आप टैक्स रेट कम होता है.
इंडेक्सेशन लाभ लेकर
जब आप किसी आवासीय संपत्ति को कम से कम दो वर्षों तक अपने पास रखने के बाद उसे बेचते हैं, तो आप इंडेक्सेशन लाभ का लाभ उठा सकते हैं. इंडेक्सेशन, संपत्ति की खरीद लागत को मुद्रास्फीति के अनुसार समायोजित करता है, जिससे लाभ की राशि और उस पर लगने वाले टैक्स में कमी आती है.
नई प्रॉपर्टी खरीदकर
रेजिडेंशियल प्रॉपर्टी की सेल पर टैक्स बचाने के लिए सेल से एक साल पहले या दो साल बाद नई प्रॉपर्टी खरीदें. वैकल्पिक रूप से, सेल के बाद तीन साल के भीतर एक नई प्रॉपर्टी का कंस्ट्रक्ट करें. यदि आप बिल्डर के साथ फ्लैट बुक करते हैं, तो सुनिश्चित करें कि फ्लैट की पूरा होने की तारीख तीन साल की अवधि के भीतर हो.
बांड में निवेश पर
(54EC के तहत छूट) अपने कैपिटल गेन को सरकारी बांडों में निवेश करके, आप टैक्स से छूट प्राप्त कर सकते हैं. इस लाभ का दावा करने के लिए प्रॉपर्टी बिक्री के छह महीने के भीतर निवेश करें. इन बांड्स की लॉक-इन अवधि 5 साल होनी चाहिए.
कुछ अन्य तरीके
इसके अलावा टैक्स लॉस हार्वेस्टिंग, कैपिटल गेन को कैपिटल गेन अकाउंट स्कीम (CGAS) में निवेश करके और मैन्युफैक्चरिंग में लगी कंपनी के शेयरों में मुनाफे को फिर से निवेश करके भी टैक्स में छूट ली जा सकती है.
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